
सीहोर, एमपी विश्वास न्यूज
सीहोर, 28 अप्रैल, 2025
सीहोर।कृषि वैज्ञानिक के अनुसार रबी फसल की कटाई के बाद नरवाई में आग न लगाएं, बल्कि फसल अवशेष प्रबंधन के लिए उन्नत कृषि यंत्र एवं तकनीक का उपयोग करें। बेलर इस मशीन का उपयोग फसल अवशेषों को एकत्र करने में होता है। इससे पशु आहार और ईंधन के रूप में उपयोग में लाना आसान हो जाता है। यह मशीन फसल अवशेष को एकत्र कर, दबाकर एवं रस्सी से बांधकर गठे के रूप में मशीन के पीछे एक लाइन में गिराती चली जाती है। स्ट्रा रीपर स्ट्रा रीपर एक ऐसी फसल अवशेष प्रबंधन मशीन है, जो एक ही वार में फसल अवशेष को काटती है, थ्रेस व साफ करती है। यह मशीन फसल अवशेषों से पशु चारा बनाने के लिए उपयुक्त है।
कृषि वैज्ञानिक इस मशीन को चलाने के लिए 35 एच.पी. शक्ति के ट्रैक्टर की आवश्यकता होती है। ट्रैक्टर पी.टी.ओ. द्वारा चलित मशीनें पहली- मल्चर, जो फसल अवशेषों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटती है। इन अवशेष को डिस्क हैरो मशीन से आसानी से मिट्टी में मिला सकते हैं। दूसरी- हैप्पी सीडर, जिसमें आगे की तरफ फसल अवशेष काटने के लिए ब्लेड और पीछे बुवाई की प्रणाली जुड़ी होती है। तीसरी- रोटरी डिस्क ड्रिल, जिसमें आगे के तरफ सॉयल रेजर डिस्क और पीछे की तरफ बुवाई प्रणाली जुड़ी होती है। चौथी- रोटावेटर, जो खेत तैयार करने का एक मुख्य उपकरण है। इसमें एल या सी आकार के ब्लेड लगे होते हैं। अन्य मशीनें स्ट्रिप टिल ड्रिल एक प्रकार की सक्रिय पीटीओ चलित बुवाई मशीन है, जिसमें आगे जे प्रकार के ब्लेड और पीछे बीज बुवाई प्रणाली जुड़ी होती है। रोटरी टिल ड्रिल : एक पीटीओ चलित बुवाई मशीन है, जिसमें आगे रोटावेटर और पीछे बुवाई प्रणाली जुड़ी रहती है। इससे खेत की तैयारी और बुवाई दोनों कार्य एक साथ किए जाते हैं।
कृषि वैज्ञानिक संयुक्त डिस्क हैरो एक संयुक्त भू-परिष्करण उपकरण है जिसमें आगे की डिस्क पी.टी.ओ. द्वारा चलित और पीछे की डिस्क स्वतंत्र रूप से घूमती है। एमबी प्लाऊ मृदा की प्राथमिक जुताई के लिए एक मुख्य तंत्र है, यह फसल अवशेष व ऊपरी सतह में स्थित खरपतवारों के बीजों को अधिक गहराई में दबाने में सक्षम है। जीरो टिल ड्रिल : ट्रैक्टर से खींची जाने वाली बुवाई मशीन है, जिससे उल्टे टी आकार के फरो ओपनर्स लगे होते हैं। बिना जुताई किए फसल की सीधी बुवाई करने में सक्षम है। बेलर मशीन एक 1 घंटे में 1.5 हैक्टेयर खेत में फसल अवशेषों की बंधाई कर देती है। डीजल की खपत लगभग 4 लीटर प्रति घंटा होती है। नरवाई को जलाने के बजाय पशु आहार और ईंधन के रूप में काम में लें। इससे बचत होगी, पर्यावरण को नुकसान का खतरा कम होगा। विभिन्न कृषि यंत्रों पर अनुदान मिलता है, जिसके लिए आप अपने जिले के उप संचालक कृषि कार्यालय में सम्पर्क कर सकते हैं।
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