🔴 “पास में खाली वेयरहाउस, फिर भी 45 KM दूर धक्के—उपार्जन व्यवस्था या ‘मिलीभगत का खेल’?”
“7 KM पर 8000 क्विंटल की जगह खाली, फिर भी किसानों को 45 KM दूर भेजा—अब बोरदी वेयरहाउस की 2 KM लंबी लाइन ने बढ़ाए सवाल”

📍इछावर (सीहोर), एमपी विश्वास न्यूज
इछावर।गेहूं उपार्जन व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। इछावर क्षेत्र से सामने आया ताजा मामला पूरी व्यवस्था पर गंभीर शक पैदा कर रहा है—जहां एक तरफ पास में वेयरहाउस खाली पड़े हैं, तो दूसरी तरफ किसानों को या तो 45 किलोमीटर दूर भेजा जा रहा है या फिर कई दिनों तक लंबी लाइनों में खड़ा रहने को मजबूर किया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, मार्केटिंग सोसाइटी इछावर द्वारा सिराडी स्थित रिद्धि वेयरहाउस में गेहूं खरीदी की जा रही थी। यहां किसान 4 दिनों से तुलाई का इंतजार कर रहे थे, लेकिन अचानक “वेयरहाउस भर गया”
कहकर खरीदी रोक दी गई। इसके बाद किसानों को 45 किलोमीटर दूर नारंग वेयरहाउस (नादान) भेजने की बात कही गई।
सबसे बड़ा सवाल तब खड़ा होता है जब सामने आता है कि सिराडी से महज 7 किलोमीटर दूर मंगलम वेयरहाउस (खेरी रोड) में करीब 8000 क्विंटल गेहूं रखने की जगह खाली थी—फिर भी किसानों को वहां नहीं भेजा गया।
इसी बीच एक और चौंकाने वाला दृश्य बोरदी वेयरहाउस पर देखने को मिला, जहां करीब 2 किलोमीटर लंबी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की लाइन लगी हुई है। किसान घंटों नहीं, बल्कि कई दिनों तक अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं।
👉 सवाल यह है कि जब नारंग वेयरहाउस (नादान) खाली पड़ा था, तो बोरदी वेयरहाउस की भीड़ कम करने के लिए वहां खरीदी केंद्र पहले से क्यों नहीं शुरू किया गया?
👉 क्यों किसानों को लाइन में सड़ने दिया गया, जबकि विकल्प मौजूद थे?
यह स्थिति केवल अव्यवस्था नहीं, बल्कि योजनाबद्ध लापरवाही या संभावित मिलीभगत की ओर इशारा करती है।

🗣️ किसानों का आरोप:
किसानों का कहना है कि जानबूझकर व्यवस्था को इस तरह चलाया जा रहा है, जिससे उन्हें अधिक दूरी, किराया और समय का नुकसान उठाना पड़े।
“यहां 2 किलोमीटर लाइन में खड़े रहो या 45 किलोमीटर दूर जाओ—हर हाल में नुकसान किसान का ही है,” एक किसान ने नाराजगी जताई।
⚠️ व्यवस्था पर गंभीर सवाल:
पास के वेयरहाउस खाली, फिर भी उपयोग नहीं
बोरदी वेयरहाउस पर 2 KM लंबी लाइन

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