आदिवासी बच्चों की शिक्षा से खुला मज़ाक: स्कूल की छत नदारद, तपती धूप में पढ़ने को मजबूर मासूम
जर्जर भवन, टूटी दीवारें और ऊपर से नदारद छत — यह स्कूल कम और प्रशासनिक लापरवाही का जीता-जागता स्मारक ज़्यादा लगता है।

सीहोर/मध्य प्रदेश, एमपी विश्वास न्यूज
सीहोर।मध्यप्रदेश में “शिक्षा के अधिकार” की हकीकत एक बार फिर शर्मसार हो गई है। सीहोर जिले के इछावर विकासखंड स्थित प्राथमिक शाला सुआखेड़ा में आदिवासी बच्चों का भविष्य खुले आसमान के नीचे झुलस रहा है। स्कूल भवन की हालत इतनी बदतर है कि कक्षा के ऊपर छत ही नहीं, और बच्चे बिलबिलाती धूप में ज़मीन पर बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं।

जर्जर भवन, टूटी दीवारें और ऊपर से नदारद छत — यह स्कूल कम और प्रशासनिक लापरवाही का जीता-जागता स्मारक ज़्यादा लगता है। सवाल यह है कि जब छत ही नहीं तो यह स्कूल किस भरोसे संचालित किया जा रहा है? क्या आदिवासी इलाकों के बच्चों की ज़िंदगी और शिक्षा की कोई कीमत नहीं?

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