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सीहोर जिला प्रशासन की लापरवाही,बिना निरीक्षण के किया,भोपाल इन्दौर स्टेट हाइवे डायवर्ड

डायवर्ड रास्ते पर कई घंटों तक जाम की स्थिति बनी

सीहोर राजेश माँझी, एमपी विश्वास न्यूज

सीहोर।कुंभ की तर्ज पर कुबेरेश्वरधाम पर रुद्राक्ष महोत्सव 25 फरवरी से 03 मार्च 2025 तक महाशिवरात्रि पर्व पर शिव महापुराण कथा का आयोजन किया जा रहा है।इस कथा में देशभर से लाखों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।

कलेक्टर बालागुरू के. ने कथा के दौरान बेहतर इंतजाम करने एवं लोगों की सुरक्षा के साथ ही नेशनल हाईवे पर आवागमन सुगम बनाए रखने के लिए परिवर्तित मार्गों एवं वैकल्पिक मार्गों की जानकारी के लिए पोस्टर बैनर के माध्यम से नागरिकों को सूचित करने के निर्देश दिए थे।

डायवर्ड मार्ग भाऊखेड़ी जोड़ से अमलाहा एक ग्रामीण अंचल से गुजरता हुआ डबल रोड है।डबल रोड की भाऊ खेड़ी से अमलाहा 14-17 किलोमीटर है। यह रास्ता कई ग्रामों के बीच से होकर अमलाहा पहुंचता है।

भाऊखेड़ी,नरसिंहखेड़ा,दुर्गपुरा, धमन्दा और अमलाहा पहुंच कर भोपाल इन्दौर स्टेट हाइवे लग जाता है। यह रास्ते में गांव में काफ़ी समस्या देखने को मिलती है। लोगो ने रास्ते पर बकरी मवेशी बांध रखी है एवं सड़क के किनारे रेत गिट्टी के ढेर लगे है।वही आवारा मवेशी का भी जमावड़ा सड़क पर ही लगा रहता है।धमन्दा के सरपंच प्रतिनिधि चतुर्भुज का कहना है की कई बार गौ माता को वाहनों की टक्कर से मृत हो गई। डायवर्ड मार्ग को करने से पहले जिला प्रशासन ने किसी भी जनप्रिति निधि, आसपास के दुकानदार, स्थानीय ग्रामीण की राय लेना भी उचित नही समझा वही ग्राम में किसी को सूचना भी नहीं दी गई।

सड़क पर बंधी मवेशी,सड़क पर लगे रेत,गिट्टी के ढेर सड़क के किनारे होने पर दुर्घटना का डर लगा रहता है और आवाजाही में कठिनाई होती है।

वही राजेश बनासिया ,संतोष,बाबू लाल वर्मा,नरेश वर्मा भाऊखेड़ी ग्रामीणों का कहना है कि पहले से ही गांव में सकड़ी गली है स्टेट हाइवे जैसी चौड़ी नही है और फिर कई वर्ष सड़क को बने हो गए। लेकिन नाली निर्माण होना अभी भी बाकी है।जो अभी तक नही हुआ है,डायवर्ड मार्ग में सभी वाहन तेज रफ्तार से गुजर रहे हैं जिनको देखते हुए अभिभावकों ने अपने छोटे बच्चो को रूद्राक्ष महोत्सव तक स्कूल जानें से मना किया है।बीच गांव में जैन मंदिर अंधा मोड़ है कुछ दिन पहले रात्रि में रेत का ट्रक जैन मंदिर में ही घुस गया था। जैन मंदिर अंधा मोड़ है किसी प्रकार का सांकेतिक बोर्ड नही लगा है। जैन मंदिर अंधा मोड़ के पास हमेशा ग्रामीणों को दुर्घटना का अंदेशा लगा रहता है। जैन मंदिर अंधा मोड़ पर सांकेतिक बोर्ड लगाना अति महत्वपूर्ण है।रात्रि के समय बहुत सावधानी पूर्वक वाहन को कम रफ्तार के साथ आराम से मोड़ के निकालना पड़ता है।

मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में कुबेरेश्वर धाम पर रुद्राक्ष महोत्सव के साथ महाशिवरात्रि पर्व भी है।रुद्राक्ष वितरण का आयोजन होता है पर जिला प्रशासन के सामने जिले में एक और बड़ा आयोजन 25 फरवरी को हो रहा है आष्टा में मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत विवाह सम्मेलन का आयोजन

अधिकारियों के लिए चुनौती एक तरफ रुद्राक्ष वितरण का आयोजन दूसरी और विवाह सम्मेलन का आयोजन विवाह सम्मेलन में अधिक भीड़ होने से कई जगह जाम की स्थिति बनी हैं ओर वही भोजन पानी की चुनौती भी सामने है।

कुबेरेश्चर धाम रूद्राक्ष महोत्सव के साथ आष्टा में मुख्यमंत्री कन्या दान योजना विवाह सम्मेलन कि भी चुनौती सामने है।वही भोजन पानी की व्यवस्था भी एक बड़ी चुनौती, क्योंकि इछावर में हुए विवाहसम्मेलन में नही मिला था लोगो को भोजन भूखे ही लोटे थे घर

जब जिला प्रशासन किसी रास्ते को डायवर्ट (डाइवर्जन) करता है, तो निरीक्षण के दौरान कई महत्वपूर्ण सावधानियाँ बरती जाती हैं ताकि नया रास्ता सुरक्षित, सुगम और मानकों के अनुरूप हो। ये सावधानियाँ आम तौर पर निम्नलिखित होती हैं:

  1. सड़क की संरचना और मजबूती

डायवर्ट किए गए रास्ते की सतह मजबूत होनी चाहिए, ताकि भारी वाहनों और यातायात के दबाव को सह सके।

मिट्टी, गिट्टी, डामर या कंक्रीट का सही मिश्रण होना चाहिए।

जलभराव से बचने के लिए सही ढलान और जल निकासी व्यवस्था होनी चाहिए।

  1. सुरक्षा उपाय

रास्ते के दोनों ओर बैरिकेडिंग या संकेतक बोर्ड लगाए जाते हैं ताकि लोग सही दिशा में चलें।

अंधे मोड़ों और गड्ढों को साफ किया जाता है और अगर जरूरत हो तो स्पीड ब्रेकर लगाए जाते हैं।

अगर रास्ता अस्थायी है, तो अस्थायी लाइटिंग (रात के समय) और रेडियम मार्किंग का ध्यान रखा जाता है।

  1. ट्रैफिक मैनेजमेंट

डायवर्ट किए गए रास्ते पर यातायात सुचारू रूप से चल सके, इसके लिए चौड़ाई सही होनी चाहिए।

ट्रैफिक के दबाव को ध्यान में रखते हुए पुलिस या ट्रैफिक गाइडेंस की व्यवस्था की जाती है।

यदि रास्ता लंबा या संकरा है, तो ट्रैफिक कंट्रोल के लिए संकेतक और वॉर्निंग बोर्ड लगाए जाते हैं।

  1. स्थानीय जनसंख्या और सुविधाएँ

नया रास्ता स्थानीय लोगों के लिए असुविधाजनक न हो, इसका ध्यान रखा जाता है।

एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और अन्य आपातकालीन सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाती है।

आसपास के दुकानदारों और निवासियों से भी राय ली जा सकती है।

  1. मौसम और प्राकृतिक स्थितियाँ

अगर रास्ता बारिश के दौरान इस्तेमाल होना है, तो उसमें जल निकासी की व्यवस्था होनी चाहिए।

पहाड़ी या भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में मिट्टी की पकड़ और सुरक्षा उपायों पर ध्यान दिया जाता है।

  1. वैकल्पिक मार्ग का मूल्यांकन

डायवर्ट किए गए रास्ते को मूल मार्ग से जोड़ने के लिए सही दिशा तय की जाती है।

यह देखा जाता है कि नया रास्ता मुख्य सड़क से जुड़कर ट्रैफिक को सुचारू रूप से वापस ला सकता है या नहीं।

  1. निर्माण एजेंसियों की जवाबदेही

रास्ता बनाने वाली एजेंसी या ठेकेदार से गुणवत्ता मानकों का पालन करवाया जाता है।

प्रशासन सुनिश्चित करता है कि रास्ते की जांच अधिकारी द्वारा की गई हो और सुरक्षा प्रमाणपत्र प्राप्त हो।

यदि इन सावधानियों का पालन नहीं किया जाता है, तो आम जनता को समस्या हो सकती है, दुर्घटनाएँ हो सकती हैं और प्रशासन पर सवाल उठ सकते हैं।

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