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पशुधन के स्वास्थ्य संवर्धन और सुरक्षा के लिए पूजा-अर्चना की अनूठी परंपरा है बारह खंबा मेला

पशुधन के स्वास्थ्य संवर्धन और सुरक्षा के लिए पूजा-अर्चना की अनूठी परंपरा है बारह खंबा मेला

सीहोर/इछावर,एमपी विश्वास न्यूज

सीहोर/इछावर।भारत विविध बहुरंगी संस्कृतियो और परंपराओं का देश है,जो अपने जीवंत त्योहारो के लिए पूरी दुनिया मे प्रसिद्ध है। हमारे देश मे कुछ किलोमीटर के अन्तराल मे ही स्थानीय बोली परिवेश और सांस्कृतिक विविधता के दर्शन हो जाते हैं। देश के तीज त्योहारों और मेलो का जीवन मे एक विशेष महत्व है। यह हमारी जीवंत और समृद्धशाली सांस्कृतिक का प्रतीक है जो सनातन से अविरल प्रवाहमान है। भारतीय संस्कृति मे केवल मनुष्य ही नहीं बल्कि सृष्टि के प्रत्येक प्राणी के कल्याण की कामना है।

मध्य प्रदेश के सीहोर जिला मुख्यालय से 40 किलोमीटर दूर लगने वाला बारह खम्बा मेला एक ऐसा मेला है,जिसमें पशुओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए पूजा-अर्चना की जाती है।

बता दे की दीपावाली के दूसरे दिन अर्थात पडवाँ के दिन इछावर तहसील के ग्राम देवपुरा में बारह खंबा मेला लगता है। यह मेला मध्यक्षेत्र का सबसे बड़ा मेला है, जिसमें लाखों की संख्या में श्रद्धालु यहां आते हैं। इस मेले में लाखों जनजातीय वर्ग के लोग अपने ईष्ट देव की शिला का दूध से अभिषेक और पूजा अर्चना कर अपने पशुधन की स्वास्थ्य और सुरक्षा की कामना करते हैं। यहां सुबह से शाम तक हजारो लीटर दूध से देवशिला का अभिषेक किया जाता है। एसी मान्यता है कि यहा देवशिला पर अपने दुधारू पशु का दूध चढ़ाने से वह साल भर रोगमुक्त रहते हैं। जनजातीय समुदाय के अलावा सभी वर्गों के श्रद्धालु यहां आ रहे हैं और यह मेला कई प्रदेश एवं कई राज्यों के बड़े मेलों में से एक है जिसमें अनुमानित तीन लाख से अधिक श्रद्धालु यहां आते हैं।

यह बारहखंबा मेला इछावर में प्राचीन काल से ही लगता आ रहा है। इछावर से 20 किमी दूर देवपुरा गाँव में जनजातीय समुदाय के आराध्य देव की देवरूपी शिला है, जिसे बारह खंबा वाले देव महाराज के नाम से जाना जाता है। यह 12 शिला स्तम्भों से बने छत के नीचे विद्यमान थी। इसीलिए इस स्थान का नाम बारह खंबा पड़ गया। वर्तमान में देवपुरा गाँव बारह खंबा के नाम से ही जाना जाता

बता दे की दीपावली के दूसरे दिन बुधवार को मेले में लाखों श्रद्धालु पहुंचे

बारह खम्बा मेले के बारे इस क्षेत्र में यह किवदंती प्रचलित है कि गाँव के एक किसान को लगातार पशुधन की हानि हो रही थी। उसके पशु लगातार बीमार रहते और कुछ समय बाद उनकी मृत्यु हो जाती थी। कुछ समय बाद इस किसान को जंगल में एक ग्वाला मिला। ग्वाला ने उस किसान से कहा कि बारह खंबे के बीच एक देवशिला है। उस देवशिला पर पड़वाँ के दिन दूध चढ़ाना फिर साल भर तुम्हारे पशु स्वस्थ रहेंगे। यह बात उस किसान ने ग्रामवासियों को बताई। तभी से यहाँ दिपावली के दूसरे दिन यानी पड़वाँ को दूध चढ़ाने की प्रथा शुरू हो गई और मेला लगने लगा
दीपावली के दूसरे दिन बाराखंबा मेला लगता है जिसमें लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं बड़ी बात यह रही कि प्रशासन बड़ी संख्या में मौजूद रहा उसके बाद भी भीड़ को संभालने में असमर्थ रहा कई घटना है सामने आई जैसे लोगों के पर्स चोरी होना हालांकि इस बार मंदिर समिति ने चप्पे चप्पे पर सीसीटीवी कैमरे लगाए हैं मेला पर निगरानी बनाए रखी इसी प्रकार इछावर खेरी रोड एवं जामली खेरी रोड एवं नीलबड़ बाराखंबा एवं डूंडलावा रोड पर जाम की स्थिति निर्मित रही कई श्रद्धालु कई किलोमीटर दूर से अपने वाहन खड़े करके पैदल पहुंचे मेले मे श्रद्धालुओं ने कई बड़े झूलों में झूले भी झूले और कई दुकानों से खरीददारी भी की।

इस मौके पर पहुंचे वर्तमान मंत्री करण सिंह वर्मा एवं पूर्व विधायक शैलेंद्र पटेल सहित जिले के अधिकारी कर्मचारी मौजूद रहे।

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