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बसंत पंचमी के पर दुर्लभ संयोग, मां सरस्वती की कृपा का पर्व

बसंत पंचमी के पर दुर्लभ संयोग, मां सरस्वती की कृपा का पर्व,

•”इस साल बसंत पंचमी का त्यौहार 23 जनवरी को मनाया जाएगा।

पंडित गणेश शर्मा llllllllllllllllllllllllllllllll

सीहोर, एमपी विश्वास न्यूज

ज्योतिष पद्म भूषण स्वर्ण पदक प्राप्त डॉ पंडित गणेश शर्मा ने बताया कि बसंत पंचमी हर साल माघ माह की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी का पर्व मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन मां सरस्वती का जन्म हुआ था, इसलिए बसंत पंचमी को सरस्वती जन्मोत्सव के रूप में भी जाना जाता है।

इसके अलावा बसंत पंचमी को श्री पंचमी और सरस्वती पूजा के नाम भी जाना जाता है। इस दिन विद्या और कला की देवी विधिपूर्वक पूजा करने से बुद्धि और ज्ञान में वृद्धि होती है। •”इस साल बसंत पंचमी का त्यौहार 23 जनवरी को मनाया जाएगा।” इस कई दुर्लभ संयोग भी बन रहा है। बसंत पंचमी के दिन बनने वाले शुभ योग और मुहूर्त ।

बसंत पंचमी 2026 शुभ योग।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।


पंडित शर्मा के अनुसार बसंत पंचमी के दिन चंद्रमा मीन राशि में प्रवेश करेंगे। साथ ही इस दिन चंद्रमा से चतुर्थ भाव में गुरु के होने से गजकेसरी का शुभ संयोग भी बन रहा है। गजकेसरी योग बहुत ही शुभ माना जाता है। इस योग में देवी सरस्वती की पूजा करने से छात्रों को उत्तम फलों की प्राप्ति होती है। इसके अलावा 23 जनवरी यानी बसंत पंचमी के दिन बुधादित्य योग का विशेष योग भी बन रहा है। सूर्य और बुध की युति से बनने वाला बुधादित्य योग करियर, शिक्षा और व्यापार में तरक्की देने वाला माना जाता है। इसके अलावा बसंत पंचमी के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है। सर्वार्थ सिद्धि योग में शुरू किए गए कार्यों में सफलता मिलती है।

बसंत पंचमी पंचांग के अनुसार, माघ माह की पंचमी तिथि का आरंभ 23 जनवरी 2026 को 02:28 am पर होगा। पंचमी तिथि का समापन 24 जनवरी को 01:46am पर होगा। बसंत पंचमी के दिन सरस्वती पूजा के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 7 बजकर 15 मिनट से दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक रहेगा। वसंत पंचमी पर सरस्वती चालीसा का पाठ करना शुभ होता है। इसके प्रभाव से व्यक्ति के सुख में वृद्धि और कला-कौशल में निखार आता है इस साल 23 जनवरी 2026 को वसंत पंचमी का पर्व मनाया जा रहा है। यह माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि है, जिसपर मां सरस्वती का प्राकट्य हुआ था। पौराणिक कथाओं के मुताबिक, वसंत पंचमी ‘बसंत’ के आगमन का प्रतीक होता है। इस तिथि पर देवी सरस्वती की उपासना व उनके नामों का जाप करने से जीवन में न केवल ज्ञान और बुद्धि का विकास होता है बल्कि उनके घर में भी सकारात्मकता और बरकत बनी रहती है। हालांकि, मां सरस्वती की विशेष कृपा पाने के लिए सरस्वती चालीसा का पाठ अधिक फलदायी माना गया है। इससे साधक की स्मरण शक्ति और एकाग्रता में वृद्धि होती है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वसंत पंचमी के पावन अवसर पर सरस्वती चालीसा का पाठ करना अत्यंत शुभ होता है। इससे ज्ञान में निरंतर वृद्धि होती है, कला और रचनात्मकता में निखार आता है। यही नहीं करियर और शिक्षा के क्षेत्र में सफलता के योग भी बनते हैं। वहीं इस पाठ से मन शांत भी रहता है और वाणी की देवी मां सरस्वती की विशेष कृपा मिलती हैं।

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