राजस्व मंत्री की ईमानदार छवि धूमिल करने की कोशिश? कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
बरखेड़ा कुर्मी उचित मूल्य दुकान में नगद वितरण से मचा हड़कंप, सेल्समैन ने किस आदेश के तहत बांटे पैसे? जांच के निर्देश

इछावर, एमपी विश्वास न्यूज | संपर्क: 9200718280
बरखेड़ा कुर्मी/इछावर। गरीब परिवारों को मिलने वाले फ्री राशन की व्यवस्था में बड़ा सवाल खड़ा करने वाला मामला सामने आया है। बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति मर्यादित आमला रामजीपुरा की शाखा से जुड़ी बरखेड़ा कुर्मी उचित मूल्य दुकान पर हितग्राहियों को खाद्यान्न देने के बजाय कथित तौर पर नगद राशि बांटे जाने की बात सामने आई है। मामला सामने आने के बाद राशन वितरण व्यवस्था और दुकान संचालन को लेकर सवालों का दौर शुरू हो गया है।

मंत्री की ईमानदार छवि धूमिल करने की कोशिश? कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा के क्षेत्र में राशन की जगह कथित तौर पर नगद राशि बांटे जाने का मामला सामने आने के बाद जिम्मेदार कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नियमों को दरकिनार कर हितग्राहियों को राशन के बजाय पैसा दिया गया है, तो ऐसी गतिविधियां मंत्री करण सिंह वर्मा की ईमानदार और साफ-सुथरी छवि को धूमिल करने की कोशिश के रूप में भी देखी जा सकती हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि हितग्राहियों को राशन की जगह पैसा बांटने का अधिकार सेल्समैन को किसने दिया? आखिर किस शासकीय योजना, आदेश या अधिकृत प्रावधान के तहत नगद राशि का वितरण किया गया? यदि इसके लिए कोई सरकारी अनुमति थी, तो उसका रिकॉर्ड क्या है?
गरीब परिवारों के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत निर्धारित खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाता है। ऐसे में राशन के स्थान पर नगद राशि का वितरण सामान्य व्यवस्था से अलग दिखाई देता है। यदि बरखेड़ा कुर्मी दुकान पर ऐसा हुआ है, तो पूरे मामले की जांच कर यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि नगद भुगतान शासन के किसी अधिकृत आदेश के तहत हुआ या फिर नियमों को दरकिनार कर।
राशन के बदले कैश, रिकॉर्ड में क्या दर्ज?

मामले में अब दुकान के स्टॉक रजिस्टर, वितरण रजिस्टर, पीओएस मशीन का रिकॉर्ड और संबंधित हितग्राहियों के बयान अहम माने जा रहे हैं। जांच में यह भी सामने आना चाहिए कि जिस खाद्यान्न का वितरण होना था, वह स्टॉक में मौजूद था या नहीं और यदि राशन नहीं दिया गया तो उसके स्थान पर राशि किस आधार पर दी गई।

ग्रामीणों और हितग्राहियों के बीच भी यही चर्चा है कि जब सरकार ने गरीबों के लिए राशन की व्यवस्था की है, तो दुकान पर अनाज की जगह पैसा क्यों बांटा गया? क्या नगद वितरण का कोई लिखित आदेश था? अगर था तो किस अधिकारी ने जारी किया और कितने हितग्राहियों को इसका लाभ दिया गया?

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