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भगवान गणेश को मानने के साथ जानना भी जरुरी है

भगवान गणेश को मानने के साथ जानना भी जरुरी है

ब्रिजिशनगर /इछावर, एमपी विश्वास न्यूज

ब्रिजिशनगर /इछावर।ज्योति जागृती संस्थान शाखा भेरूंदा द्वारा एक दिवसीय सत्संग एवं भजन संकीर्तन का आयोजन श्री राम मंदिर ब्रिजिशनगर में किया गया जिसमें गुरुदेव सर्व श्री आशुतोष महाराज के शिष्य स्वामी आशानंद ने भगवान गणेश जी के सुंदर व्याख्या कर सबका ध्यान आकर्षण किया, स्वामी जी ने कहा आज पूरा भारत गणेश उत्सव बड़े ही हर्ष उल्लास के साथ मना रहा है यूं तो भगवान गणेश प्रथम पूजनीय हैं परंतु श्री बाल गंगाधर तिलक ने 1893 में स्वतंत्रता आंदोलन के समय गणेश पूजन को सार्वजनिक रूप दिया ताकि लोग जाति पाति और भेदभाव से ऊपर उठकर माँ भारतीय के लिए संगठित और संकल्पित होकर देश हित का कार्य करें! पहले यह पूजा घर-घर तक हीं सीमित थी, बालगंगाधर तिलक ने गणेश उत्सव को स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्र जागरण का साधन बनाया, भगवान गणेश का रूप अत्यंत मोहक और प्रेरणादाई है जिसे जानकर हम अपने जीवन को सुगम बना सकते हैं उन्होंने संपूर्ण शरीर की महत्वता पर प्रकाश डालते हुए कहा बड़े कान संकेत करता है कि ज्यादा से ज्यादा अच्छे विचारों को सुना जाए, छोटी आंख गहराई से लक्ष्य पे दृष्टि को टिका के रखना,
लम्बी सुंढ कर्म योग ओर ज्ञान योग का समन्वय है,
बड़ा पेट:अच्छे विचार ओर सदगुनों का संग्रह करने का प्रेरणा प्रदान करता है छोटा मुंह कम बोलना ओर विवेक युक्त बोलने का सन्देश देता है!
एक दंत : एकाग्रता और अपूर्णता मे भी श्रेष्ठता प्राप्त करने की प्रेरणा
मुषक वाहन :- छोटे से छोटे वास्तु और व्यक्ति भी महत्वपूर्ण है इसे नजर अंदाज नहीं करना चाहिए,
माता-पिता का सम्मान करना चाहिए, माता पिता के चरणों सभी तीर्थ और सभी धाम है भगवान शिव गणेश जी के पिता भी हैं और आध्यत्मिक गुरु भी है भगवान शिव ने गणेश जी का गर्दन नहीं काटा बल्कि अहंकार का सर काटा और विवेक युक्त सर जोड़ दिया इस लिये गणेश जी पहले पूजे जाते है

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