इछावर में गरीबों के हक के राशन पर उठे गंभीर सवाल, दौलतपुर के 136 परिवारों को नहीं मिला अनाज, झरखेड़ा में 6 माह से राशन बंद होने का आरोप
इछावर। एमपी विश्वास न्यूज | संपर्क: 9200718280
इछावर।इछावर तहसील क्षेत्र में गरीब और पात्र परिवारों को मिलने वाले सरकारी राशन की व्यवस्था को लेकर एक के बाद एक गंभीर शिकायतें सामने आ रही हैं। दौलतपुर, झरखेड़ा और बरखेड़ा कुर्मी से सामने आए मामलों ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कहीं पात्र गरीब परिवार महीनों से राशन के लिए भटक रहे हैं, तो कहीं राशन वितरण में अनियमितता और पात्रता पर्ची से राशन निकालने के आरोप लगाए गए हैं। वहीं बरखेड़ा कुर्मी में खाद्यान्न की जगह कथित तौर पर नगद राशि बांटे जाने का मामला सामने आने से हड़कंप मचा हुआ है।
दौलतपुर में 236 बीपीएल परिवार, 136 को राशन नहीं मिलने का आरोप
ग्राम दौलतपुर के ग्रामीणों ने अनुविभागीय अधिकारी इछावर को शिकायत देकर बताया कि गांव में करीब 236 बीपीएल पात्र गरीब परिवार हैं। शिकायत के अनुसार समूह द्वारा केवल करीब 100 परिवारों को राशन दिया गया, जबकि शेष 136 परिवारों को राशन नहीं मिला।
ग्रामीणों का आरोप है कि सेल्समैन द्वारा शासन से राशन नहीं आने की बात कही जा रही है, लेकिन दूसरी ओर रजिस्टर में सभी परिवारों को राशन वितरण दर्ज किए जाने की बात शिकायत में कही गई है।
ग्रामीणों के मुताबिक तीन माह से राशन नहीं मिलने के कारण गरीब और आदिवासी परिवारों के सामने भरण-पोषण का संकट खड़ा हो गया है।
झरखेड़ा में 6 माह से राशन नहीं देने का आरोप
ग्राम झरखेड़ा के उपभोक्ताओं ने भी 24 अगस्त को एसडीओ राजस्व इछावर को शिकायत सौंपी है। शिकायत में कहा गया है कि उन्हें विंध्याचल स्व सहायता समूह लालियाखेड़ी की उचित मूल्य दुकान से राशन मिलता है, लेकिन पिछले करीब 6 माह से राशन नहीं दिया जा रहा है।
ग्रामीणों ने वितरण में भारी अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए दावा किया है कि उनकी पात्रता पर्ची से कथित तौर पर राशन निकाल लिया जाता है, जबकि उन्हें खाद्यान्न नहीं दिया जाता। शिकायत में यह भी आरोप है कि दुकान संचालक द्वारा गरीब और अशिक्षित लोगों से घर पर अंगूठा लगवाकर राशन निकालने की पर्ची तैयार कर ली जाती है, लेकिन खाद्यान्न नहीं दिया जाता।
ग्रामीणों ने दुकान की नियमित निगरानी और उनके गांव में महीने में कम से कम एक दिन राशन दुकान खुलवाने अथवा किसी अन्य उचित मूल्य दुकान से राशन उपलब्ध कराने की मांग की है।
शिकायत की प्रतिलिपि कलेक्टर सीहोर को भी दी गई है।
बरखेड़ा कुर्मी में राशन की जगह कथित तौर पर कैश बांटने का मामला
इसी बीच बरखेड़ा कुर्मी की उचित मूल्य दुकान से जुड़ा मामला सबसे ज्यादा सवाल खड़े कर रहा है। यहां हितग्राहियों को खाद्यान्न के स्थान पर कथित तौर पर नगद राशि दिए जाने की बात सामने आई है।
बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति मर्यादित आमला रामजीपुरा की शाखा से जुड़ी दुकान में कथित नगद वितरण के बाद सवाल उठ रहा है कि राशन की जगह पैसा बांटने का आदेश आखिर किसने दिया?
यदि नगद राशि का वितरण किसी सरकारी योजना या अधिकृत आदेश के तहत किया गया था, तो उसका लिखित आदेश और रिकॉर्ड सामने आना चाहिए। वहीं यदि ऐसा कोई प्रावधान या आदेश नहीं था, तो यह जांच का गंभीर विषय है।
राशन दुकान के रिकॉर्ड से खुलेगा राज
तीनों मामलों में अब स्टॉक रजिस्टर, वितरण रजिस्टर, पीओएस मशीन का रिकॉर्ड, खाद्यान्न आवंटन और हितग्राहियों के बयान महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। जांच के जरिए यह स्पष्ट होना जरूरी है कि शासन से कितना राशन आया, कितना वितरित हुआ और रिकॉर्ड में कितना दर्ज किया गया।
सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि यदि किसी हितग्राही को राशन नहीं मिला तो रिकॉर्ड में उसका वितरण कैसे दर्ज हुआ? और यदि बरखेड़ा कुर्मी में राशन की जगह नगद राशि दी गई, तो उसके पीछे कौन-सा आदेश या नियम था?
जांच के बाद सामने आएगी सच्चाई
मामले की जानकारी एसडीएम इछावर के संज्ञान में आने के बाद जांच के निर्देश दिए जाने की बात सामने आई है। अब जांच में यह स्पष्ट होगा कि संबंधित राशन दुकानों पर वास्तव में खाद्यान्न वितरण में क्या गड़बड़ी हुई और शिकायतों में लगाए गए आरोप कितने सही हैं।
फिलहाल तीन अलग-अलग गांवों से उठी शिकायतों ने इछावर की राशन वितरण व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। गरीबों के हक का राशन आखिर कहां गया?
क्या कागजों में राशन बांट दिया गया और जमीन पर हितग्राही खाली हाथ रह गए?
राशन की जगह कैश बांटने का आदेश किसने दिया?
और अगर कोई आदेश नहीं था, तो गरीबों के हिस्से के अनाज के बदले पैसा बांटने की नौबत क्यों आई?
इन सवालों के जवाब अब प्रशासनिक जांच से मिलने का इंतजार है।
एसडीएम के संज्ञान में मामला, जांच के निर्देश
मामले की जानकारी एसडीएम स्वाती मिश्रा, इछावर के संज्ञान में आने के बाद तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। अब जांच के बाद ही तस्वीर साफ होगी कि बरखेड़ा कुर्मी उचित मूल्य दुकान पर नगद राशि का वितरण किस प्रावधान के तहत किया गया और इसमें नियमों का पालन हुआ या नहीं।