भोपाल से इंदौर सिर्फ दो घंटे में: एक्सप्रेस-वे का रूट फाइनल, इंडस्ट्रियल और लॉजिस्टिक ज़ोन बनेंगे; सिंहस्थ तक तैयार होगा
सात तहसील के 59, गांव जुड़ेंगे

भोपाल/मध्य प्रदेश, एमपी विश्वास न्यूज
भोपाल।भोपाल से इंदौर तक का सफ़र लोग सालों से करते आ रहे हैं। इस सफ़र की सबसे बड़ी शिकायत यही रही है कि रास्ता लंबा है और जाम से भरा हुआ है। फिलहाल सड़क मार्ग से जाने में साढ़े तीन से चार घंटे तक का समय लग जाता है। लेकिन अब हालात बदलने वाले हैं। सरकार का दावा है कि वही दूरी अब महज़ डेढ़ से दो घंटे में पूरी हो जाएगी। वजह है: भोपाल और इंदौर के बीच बनने वाला नया हाईस्पीड एक्सप्रेस-वे कॉरिडोर।
यह सिर्फ़ सड़क नहीं होगी, बल्कि सैकड़ों गांवों और कस्बों की तकदीर बदलने का जरिया बनेगी। भोपाल और इंदौर जैसे बड़े शहरों की रफ्तार तो पहले से तेज़ है, लेकिन इनके बीच बसी बस्तियां अब इस एक्सप्रेस-वे से नए सपनों को पंख देंगी। खेतों के किनारे चमकती गाड़ियां दौड़ेंगी, पुराने ढाबों के साथ नए होटल-रेस्टोरेंट और इंडस्ट्रियल पार्क खड़े होंगे और जमीन की कीमतें भी बढ़ेगी।

एक्सप्रेस-वे का खाका तैयार
नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) इसे भारत माला हाईवे की तर्ज पर डेवलप करने जा रही है। राज्य सरकार की सहमति के बाद अलाइनमेंट डीपीआर सड़क परिवहन मंत्रालय को भेज दी गई है। जैसे ही मंजूरी मिलेगी, मैदानी काम शुरू होगा। योजना है कि सिंहस्थ 2028 से पहले इस एक्सप्रेस-वे को शुरू कर दिया जाए।
क्यों पड़ी इस हाईवे की ज़रूरत?
लोग पूछते हैं; जब पहले से हाईवे है, तो नया क्यों? इसकी कई वजहें हैं।
पहली वजह: मौजूदा हाईवे पर ट्रैफिक का दबाव
NHAI के ट्रैफिक डेटा के मुताबिक रोज़ाना 30 हज़ार से ज्यादा वाहन इस रूट से गुजरते हैं। आने वाले समय में यह दबाव और बढ़ेगा।
दूसरी वजह: जगह-जगह जाम
मेहतवाड़ा से डोडी तक तो अक्सर जाम लगता है। जावर जोड़ पर बसें रुकती हैं, यात्री चढ़ते-उतरते हैं और हाईवे ब्लॉक हो जाता है। सीहोर के पास कुबेरेश्वर धाम में तो सावन महीने में 5 लाख श्रद्धालु उमड़े थे और हाईवे 72 घंटे जाम रहा।
तीसरी वजह: कस्बों की रुकावट
सीहोर, आष्टा और सोनकच्छ जैसे कस्बों से होकर मौजूदा हाईवे गुजरता है। यहां किसान अपने खेतों तक जाने के लिए ट्रैक्टर निकालते हैं, लोग टू-व्हीलर पर आते-जाते हैं। यानी हाईवे, लोकल रोड बन चुका है।
चौथी वजह: ढाबा, रेस्टोरेंट और टोल
भोपाल-इंदौर रोड पर इस समय 50 से ज्यादा ढाबे और होटल हैं। ट्रक ड्राइवर, यात्री सब यहां रुकते हैं। साथ ही, एमपीआरडीसी के चार और एनएचएआई का एक टोल है। यानी हर तरफ भीड़-भाड़ और रुकावट।
नया रूट: अब जानिए कौन से इलाके जुड़ेंगे
प्रस्तावित एक्सप्रेस-वे भोपाल के वेस्टर्न रिंग रोड से शुरू होगा और इंदौर के एमआर-10 से जुड़ेगा। इसमें तीन जिले (भोपाल, सीहोर, देवास) और सात तहसीलें आएंगी। यह पूरी तरह से नया रोड होगा। भोपाल से सीहोर के इछावर होते हुए आष्टा की इत्यादि तहसील और देवास जिले की हाटपिपल्या व बागली तहसील को जोड़ेगा।
डीपीआर के मुताबिक, नई सड़क 148-150 किलोमीटर लंबी होगी, जबकि मौजूदा सड़क 195 किलोमीटर है। यानी करीब 50 किलोमीटर की बचत और सबसे बड़ी बात यह देवास शहर से होकर नहीं गुज़रेगा।

सात तहसीलों के 59 गांव जुड़ेंगे
इस एक्सप्रेस-वे के रास्ते में आने वाले गांवों की लंबी लिस्ट है:
- हुजूर तहसील: अमरपुरा, समसपुरा, आमला।
- सीहोर तहसील: डेहरिया खुर्द, गडिया, रत्नखेरी, पाटनी, गेरूखान, इमलीखेड़ा।
- इछावर तहसील: मुवाड़ा, सेमली जदीद, मोहनपुर नौआबाद, बावड़िया, सेंधोखेड़ी, लसुड़िया कांगड़, पोंगराखाती, कस्बा इछावर, सेवनियां, निपानिया, नयापुरा, जुझारपुरा, दिवारिया, हिम्मतपुर, मुंडला, बिजोरी, चैनपुरा।
- आष्टा तहसील: भऊनरा, भटोनी, अरनिया जोहरी, मगरखेड़ी, दल्लूपुरा, लाखापुरा, झारखेड़ी, कामखेड़ाजबा, कन्नौदमिर्जा, गंगलखोटरी, झानपुरा, पगरियाहट, इत्यादि।
- जावर तहसील: देहमत, उमरदाद, जहांजनपुरा, धुराड़ाकलां।
- हाटपिपल्या तहसील: साप्ती, भवरड़ा, कनेरिया, बारोली, दोकरखेड़ा, कंझार, कावड़ी, हमीरखेड़ी, बरहानपुर, पिटावली, रेहली।
- बागली तहसील: बिलावली, देवपिपल्या, बावड़ीखेड़ा, गाराखेड़ी, बिजूखेड़ा।
गांवों में बढ़ी हलचल
इन गांवों में अब चर्चा का सबसे बड़ा मुद्दा यही है – मुआवज़ा कितना मिलेगा और सड़क बनने के बाद ज़मीन कितने में बिकेगी।
डिजाइन और स्पीड
इंडियन रोड कांग्रेस-2013 की गाइडलाइन के मुताबिक एक्सप्रेस-वे की डिजाइन स्पीड 120 किमी प्रतिघंटा तय है। यानी कारें दो घंटे में इंदौर-भोपाल का सफ़र पूरा कर सकेंगी।
ज़मीन अधिग्रहण: 1100 हेक्टेयर निजी जमीन
NHAI के अफसरों का कहना है कि अलाइनमेंट को इस तरह बनाया गया है कि ज़्यादातर सड़क सरकारी और वन भूमि से गुज़रे। फिर भी करीब 1100 हेक्टेयर निजी ज़मीन अधिग्रहण करनी पड़ेगी। यह कुल प्रोजेक्ट का 30 से 40 फीसदी हिस्सा है। दावा है कि यह प्रक्रिया छह से आठ महीने में पूरी हो जाएगी।
तीन बड़े फायदे
- मंडीदीप और पीथमपुर करीब आएंगे
इन औद्योगिक इलाकों की दूरी करीब 50 किलोमीटर कम हो जाएगी। यानी ट्रांसपोर्ट सस्ता और तेज़ होगा। - नए इंडस्ट्रियल एरिया
एक्सप्रेस-वे किनारे सरकारी ज़मीन पर इंडस्ट्रियल ज़ोन बनाए जाएंगे। जहाँ ज़मीन नहीं होगी, वहाँ किसान और उद्योगपति एमओयू करके जमीन देंगे। - रोज़गार
एक्सप्रेस-वे किनारे होटल, ढाबे, लॉजिस्टिक पार्क और इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बनेंगे। इससे रोज़गार के नए मौके खुलेंगे
इतिहास: 2019 में आया था प्लान
इस सड़क का खाका सबसे पहले 2019 में कमलनाथ सरकार ने बनाया था। उस वक्त एमपीआरडीसी को जिम्मेदारी दी गई थी और 4,260 करोड़ लागत का अनुमान लगाया गया था। लेकिन सरकार बदल गई और मामला ठंडे बस्ते में चला गया। अब दोबारा यह प्रोजेक्ट तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।
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