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क्या निर्वाचित जनप्रतिनिधियों कोकानून का सम्मान नहीं करना चाहिए ?

सीहोर, एमपी विश्वास न्यूज

क्या निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को
कानून का सम्मान नहीं करना चाहिए ?

जिला पंचायत की बैठक के बहिष्कार का मामला।

सीहोर। गत शुक्रवार जिला पंचायत की साधारण सभा की बैठक जिला पंचायत कार्यालय में आयोजित की गई। बैठक में महिला अध्यक्ष एवं सदस्यों की जगह उनके पति एवं प्रतिनिधियों द्वारा बढ़ चढ़कर भाग लेने पर नवागत जिला पंचायत सीईओ डॉ नेहा जैन ने आपत्ति लेते हुए कहां कि, साधारण सभा की बैठक में निर्वाचित सदस्य स्वयं कार्यवाही में हिस्सा ले सकते हैं।
उनके द्वारा नामित प्रतिनिधियों का साधारण सभा की बैठक में हस्तक्षेप करना नियम विरुद्ध है।
जिस पर अध्यक्ष सहित अन्य सदस्य भड़क गए एवं बैठक का बहिष्कार का निर्णय लिया। कोरम के अभाव में बैठक को स्थगित करना पड़ा।
सदस्य गंण प्रभारी मंत्री से शिकायत करने की बात करने लगे।

क्या कहता है कानून ?

नियम के अनुसार निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के अलावा केवल विधायक द्वारा नामित प्रतिनिधि विधायक के अनुपस्थिति में बैठक में भाग ले सकते हैं।

सबसे बड़ा सवाल

देश के सभी प्रमुख राजनीतिक दल
विशेष तौर से कांग्रेस और भाजपा
सार्वजनिक रूप से महिला सशक्तिकरण की बात करते हैं। चुनाव में 33 प्रतिशत आरक्षण की बात प्रमुख राजनीतिक दलों द्वारा की जाती रही है।

ऐसे में राजनीतिक दलों के द्वारा इस तरह का दोरहा रवैया कहां तक उचित है?

क्या राजनीतिक दलों के नेताओं को
निर्वाचित जनप्रतिनिधि महिलाओं के पतियों को महिला जनप्रतिनिधियों की काबिलियत पर भरोसा नहीं है।
या अपनी नेतागिरी चमकाने के लिए
महिला जनप्रतिनिधियों के अधिकारों में हस्तक्षेप करना इतना आवश्यक है की बैठक का बहिष्कार करें और कोरम में पूर्ण नहीं होने दे।

जिला पंचायत सीईओ द्वारा नियमों का पालन करवाया जा रहा है। तो उसमें इन को आपत्ति क्यों है?

आगे आगे देखें होता है क्या?

जयंत शाह (सीहोर)

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