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फिर एक बार नलजल योजना की जिले में धीमी रफ्तार…..

1 किलो मीटर दूर से ऑटो रिक्शा से पीने के पानी को लाने को मजबूर ग्रामीण

सीहोर जिले में नल-जल योजना की धीमी प्रगति: ग्रामीणों को पेयजल संकट का सामना

सीहोर/मध्य प्रदेश, एमपी विश्वास न्यूज, राजेश माँझी

सीहोर/मध्य प्रदेश।मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में नल-जल योजना के तहत पेयजल आपूर्ति का कार्य धीमी गति से चल रहा है, जिससे ग्रामीणों को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ रहा है।

खामलिया गांव में जल संकट

सीहोर जिले के खामलिया गांव में नल-जल योजना का कार्य बंद पड़ा है, जिससे 3000 की आबादी वाले इस गांव में पानी की किल्लत हो गई है। महिलाओं ने सरपंच के घर का घेराव कर अपनी नाराजगी जताई है।

रामगढ़ गांव की स्थिति

इछावर तहसील के आदिवासी बाहुल्य रामगढ़ गांव में नल-जल योजना अभी तक नहीं पहुंची है। गांव की 1300 की आबादी एक कुएं पर निर्भर है, जबकि हैंडपंपों का जल स्तर कम होने से अधिकांश हैंडपंप बंद पड़े हैं।

प्रशासनिक प्रयास

जिले में पेयजल उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कलेक्टर बालागुरू के. द्वारा नल-जल योजना के कार्यों की समीक्षा की गई है। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि नल-जल योजनाओं के काम गुणवत्तापूर्ण तथा समय पर पूर्ण किए जाएं।

निष्कर्ष

सीहोर जिले में नल-जल योजना की धीमी प्रगति के कारण ग्रामीणों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन को चाहिए कि वह योजना के कार्यों को शीघ्रता से पूर्ण कर ग्रामीणों को राहत प्रदान करे।

सतपीपलिया ग्राम पंचायत में पेयजल संकट: ग्रामीणों की पीड़ा और समाधान की उम्मीद

1 किलो मीटर दूर से पीने के पानी लाने को मजबूर ग्रामीण

ग्राम पंचायत के सराहनीय कदम से बूझ रही जनता की प्यास….

सीहोर जिले के जनपद पंचायत इछावर के अन्तर्गत आने वाली सतपीपलिया ग्राम पंचायत में पेयजल संकट एक गंभीर समस्या बन चुका है, जिससे ग्रामीणों का जीवन प्रभावित हो रहा है।प्रशासन द्वारा उठाए गए कदम सराहनीय हैं,लेकिन स्थायी समाधान के लिए जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और जल स्रोतों के विकास पर ध्यान देना आवश्यक है।

ग्राम पंचायत सतपीपलिया में गांव में पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं है।गांव का भूजल स्तर नीचे गिरने के कारण बोर खनन भी उपयोगी नही है क्योंकि जल स्तर नीचे गिरने से पानी निकलना असंभव हो गया।

गंभीर पेयजल संकट को देखते हुए ग्राम पंचायत के सरपंच अमृत लाल मालवीय द्वारा एक निजी बोर को अधिग्रहण कर जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत पानी की टंकी का निर्माण किया।पूरा गांव टंकी से पीने का पानी भरकर अपनी प्यास बुझाता है।

यह टंकी गांव से क़रीब 1 किलो मीटर दूर स्थित है।1 किलो मीटर दूर से ग्रामीणों को पीने का पानी लाने के लिए कई साधनों जैसे साइकिल,मोटर साइकिल,ऑटो रिक्शा से ले जाना पड़ता है।

वही सरपंच अमृत लाल मालवीय का कहना है कि बोर खनन के लिए मैने जनपद में 1 महीने पहले आवेदन दिया लेकिन कोई सुनवाई नही हुई, अभी तक बोर खनन नहीं हुआ। समय पर बोर खनन होने से शायद पेयजल संकट से निजात मिल सकती हैं।

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