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हवा आंधी से बर्बाद गेंहू फसल को देसी जुगाड़ से बचाया, मेवाड़ा की पहल बनी किसानों की उम्मीद

हवा आंधी से बर्बाद गेंहू फसल को देसी जुगाड़ से बचाया, मेवाड़ा की पहल बनी किसानों की उम्मीद

तूफान के बाद छाई मायूसी, खेतों में बिछी थी मेहनत की लाश

सीहोर, एमपी विश्वास न्यूज

सीहोर। पिछले दिनों बे-मौसम बरसात, तेज आंधी और ओलावृष्टि ने गेहूं की तैयार खड़ी फसल को देखते ही देखते जमीन पर गिरा दिया। खेतों में सोने सी लहलहाती फसल आड़ी होकर मानो किसानों की सालभर की मेहनत पर मातम बिछा गई। कई किसानों को लगा जैसे महीनों की तपस्या पलभर में मिट्टी में मिल गई हो। चेहरों पर चिंता की लकीरें और आंखों में बेबसी साफ झलक रही थी। नुकसान इतना बड़ा दिख रहा था कि कई किसान यह सोचकर टूट गए कि अब लागत भी निकलना मुश्किल होगा। खेतों में गिरी फसल देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो उम्मीदें भी जमीन पर बिखर गई हों।

समाजसेवी एमएस मेवाड़ा की सूझबूझ ने दिखाई नई राह

ऐसे कठिन समय में किसान व समाजसेवी एमएस मेवाड़ा ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने खेतों में गिरी गेहूं की फसल को बचाने के लिए एक सरल लेकिन प्रभावी देसी जुगाड़ सुझाया। उनका कहना था कि अगर तुरंत फसल को खड़ा कर रस्सियों से गुच्छों में बांध दिया जाए तो काफी हद तक नुकसान रोका जा सकता है। उनका यह सुझाव तेजी से गांव-गांव फैल गया। सोशल मीडिया पर भी यह उपाय वायरल होने लगा और किसानों में नई उम्मीद जगी। मेवाड़ा की पहल ने यह साबित कर दिया कि कठिन हालात में भी सूझबूझ और सामूहिक प्रयास चमत्कार कर सकते हैं।

दो दिन की मेहनत, 6 मजदूर और फिर खड़ी हो गई फसल

रामाखेड़ी गांव के एक किसान मेवाड़ा ने इस देसी उपाय को अपनाया। एक एकड़ खेत में 6 मजदूर लगाए गए और दो दिनों की मेहनत के बाद जमीन पर गिरी फसल को सावधानीपूर्वक उठाकर गुच्छों में बांध दिया गया। दो एकड़ खेत में करीब 12 मजदूरों ने रस्सी से गेहूं के पौधों को जगह-जगह सहारा देकर खड़ा कर दिया। इस पूरी प्रक्रिया में लगभग ₹4000 का खर्च आया। जहां पहले अनुमान था कि 40 क्विंटल की जगह मुश्किल से 10 क्विंटल ही निकल पाएंगे, वहीं अब 20 क्विंटल तक गेहूं बचने की उम्मीद जताई जा रही है। यानी करीब ₹50,000 की फसल को बचाने में यह देसी जुगाड़ कारगर साबित हो रहा है।

हौसले बुलंद हों तो मुश्किलें भी झुक जाती हैं

मेवाड़ा कहते है कि यह पहल केवल फसल बचाने की कहानी नहीं, बल्कि हौसले और एकजुटता की मिसाल है। जब प्रकृति की मार से किसान टूटने लगे थे, तब एक सकारात्मक सोच ने पूरे माहौल को बदल दिया। खेतों में फिर से खड़ी होती फसल ने किसानों के चेहरों पर मुस्कान लौटा दी। यह देसी जुगाड़ अब कई गांवों में अपनाया जा रहा है और किसान इसे अपनी मेहनत बचाने का हथियार बना रहे हैं। एमएस मेवाड़ा की पहल ने यह साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों तो आंधी-तूफान भी किसानों का रास्ता नहीं रोक सकते। किसान व समाजसेवी एमएस मेवाड़ा ने कहा कि शासन प्रशासन तो हमारी खराब हुई गेहूं की फसल आड़ी हुई पड़ी खेतों में गेहूं की फसल को देखने नहीं आ रहा है तो हम हमारा देसी जुगाड़ लगाकर नई तकनीकी से हमारी फसल को बचा रहे हैं साथ ही किसानों ने माननीय मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव जी से एवं केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मांग की है शांति जिला प्रशासन से कृषि विभाग से मांग की है कि किसानों की खराब हुई गेहूं की फसल आड़ी हो गई, फसल के नुकसान का सर्वे कराया जाए और तहसील से राहत राशि दी जाए किसानों को बीमा भी दिलाए जाने की मांग की गई है किसानों ने विगत दिनों भी आंदोलन प्रदर्शन किया था करनाल गांव में पीलू खेड़ी गांव में लेकिन अभी तक कोई गिरदावल पटवारी ना कृषि अधिकारी मौके पर सर्वे करने नहीं आए किसान काफी दुखी परेशान है अब किस के ऊपर दोहरी मार पड़ रही है किस ने मजदूर लगाकर किसान व समाजसेवी एमएस मेवाड़ा के कहने पर पहल पर अपनी खेतों में पड़ी हुई फसल को खड़ी करने के लिए मजदूर लगाकर रस्सी बेस गुच्छा बांधकर उसकी कड़ी की जा रही है क्योंकि शासन प्रशासन से तो किसानों को उम्मीद अभी तक बिल्कुल भी नहीं मिल पा रही है कि शासन प्रशासन कोई राहत देगा इसलिए किसान अपनी फसल को खुद बचाने में लगा हुआ इस मौके पर राम खेड़ी के किस मोतीलाल मेवाड़ा रलावती के किसान देव सिंह मेवाडा किसान महेश मेवाड़ा रमेश चंद मेवाड़ा रमेश राधेश्याम धनराज प्रहलाद बबलू किस मोहन के खेत की 5 एकड़ की जमीन की भूमि के फसल भी पूरी आदि हो गई है जो किसान राम खेड़ी का किसान है वह काफी दुखी व परेशान है।

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