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सोयाबीन की बिगड़ी फसल हाथों में लेकर सड़कों पर उतरीं ग्रामीण महिलाएं, बीमा दो..बीमा दो..के लगाए नारे

सीहोर। ज़िले के कई गांवों की सैकड़ों ग्रामीण महिलाएं हाथों में खराब सोयाबीन की फसल और तख्तियां लेकर लंबी रैली में शामिल हुईं।

महिलाओं ने बीमा कंपनी और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारे लगाए। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले पांच वर्षों से सोयाबीन की फसल लगातार खराब हो रही है, लेकिन इसके बावजूद बीमा कंपनियों ने उन्हें एक पैसा तक मुआवजा नहीं दिया।

किसान और समाजसेवी एमएस मेवाड़ा में बताया कि ग्राम मोहाली छोटी, ग्राम बडवेली, ग्राम सेवनिया,ग्राम संग्रामपुर, ग्राम लसूरिया खास, ग्राम रसुरलिया धाकड़ ,ग्राम छापरी कला, ग्राम चंदेरी, ग्राम रामा खेड़ी ग्राम कुलान्स खुर्द,कुलान्स कला, ग्राम टीला खेड़ी, ग्राम बोरखेड़ी, ग्राम कोठरी,ग्राम नंदिनी, झाल पीपली, लोहा पठार ऐसे तीन जिलों के किसान लोग बीमा राशि को लेकर के मांग कर रहे हैं। किसानों को पिछले 5 सालों से सोयाबीन की फसल खराब होने के बाद भी बीमे की राशि नहीं मिली है।

बीमा राशि नहीं मिली तो आंदोलन जारी रहेगा,किसान महिलाओं ने चेतावनी दी है कि जब तक उन्हें बीमा राशि नहीं मिलती, तब तक उनका आंदोलन इसी तरह चलता रहेगा। महिलाएं सड़क पर बैठकर धरना दे रही हैं और प्रशासन को घेरने की तैयारी में हैं। उनका कहना है कि बीमा के नाम पर केवल वसूली होती है, लेकिन जब फसल खराब होती है तो कंपनियां जिम्मेदारी से पीछे हट जाती हैं।

एक दर्जन गांव की महिलाएं उतरीं सड़क पर
ग्राम टीला खेड़ी, बोरखेड़ी, नंदिनी, कोठरी, जीवनलाल, लोहापठार, रामाखेड़ी, छापरी कला, लसूडिया खास, लहसु धाकड़, संग्रामपुर, चंदेरी, भोजनगर और ढाबला सहित करीब एक दर्जन गांव की महिलाओं ने एकजुट होकर सड़क पर उतरकर प्रशासन को चेताया।

ग्रामीण महिलाओं का आक्रोश चरम पर
महिलाओं ने हाथों में सूखी और सड़ी हुई सोयाबीन की फसल उठाकर अधिकारियों की आंखें खोलने का प्रयास किया। उनका कहना है कि यह सिर्फ एक फसल का सवाल नहीं, बल्कि उनके बच्चों की रोटी और भविष्य का सवाल है। आंदोलन तेज़ हो रहा है और महिलाएं बीमा मुआवजा मिलने तक पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।

About राजेश माँझी

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