5 सूत्रीय मांगों के निराकरण को लेकर सौंपा ज्ञापन

इछावर, एमपी विश्वास न्यूज
इछावर/सीहोर। मध्यप्रदेश पटवारी संघ ने वर्षों से लंबित 5 सूत्रीय मांगों के शीघ्र निराकरण को लेकर सरकार पर वादा निभाने का दबाव बढ़ा दिया है। प्रांतीय आवाहन पर जिला सीहोर पटवारी संघ ने शासन के नाम ज्ञापन सौंपकर लंबित मांगों का तत्काल समाधान करने की मांग की है। संघ का कहना है कि यदि जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो प्रदेशव्यापी आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

संघ के अनुसार, 25 अक्टूबर 2025 को संगठन के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री से मुख्यमंत्री निवास पर मुलाकात कर पटवारी महाधिवेशन में शामिल होने का आमंत्रण दिया था।


मुख्यमंत्री ने नवंबर 2025 में महाधिवेशन के लिए समय देने और अलग से तिथि तय कर सूचना देने का आश्वासन दिया था, लेकिन आज तक न तो महाधिवेशन की तिथि घोषित की गई और न ही वर्षों से लंबित न्यायोचित मांगों पर कोई ठोस निर्णय लिया गया।
पटवारी संघ का आरोप है कि प्रदेश के अन्य कर्मचारी संवर्गों के लिए पदोन्नति और अन्य लाभों से जुड़े आदेश जारी किए जा रहे हैं, जबकि पटवारी संवर्ग की मांगें लगातार लंबित हैं। इससे प्रदेशभर के पटवारी स्वयं को उपेक्षित और शोषित महसूस कर रहे हैं।
प्रमुख मांगें
- कैडर रिव्यू लागू कर पदोन्नति एवं समयमान वेतनमान का लाभ
संघ ने मांग की है कि शासन स्तर पर लंबित कैडर रिव्यू प्रस्ताव को तत्काल लागू किया जाए। कैडर रिव्यू लागू होने तक पटवारियों को पदोन्नति का लाभ तथा पदोन्नति से वंचित कर्मचारियों को समयमान वेतनमान दिया जाए। - नायब तहसीलदार की विभागीय परीक्षा शीघ्र आयोजित हो
पटवारी संघ का कहना है कि वर्ष 2018 के बाद से नायब तहसीलदार की विभागीय परीक्षा आयोजित नहीं हुई है। पिछले लगभग 25 वर्षों में यह परीक्षा केवल एक बार हुई है। इसलिए विभागीय विषयों के आधार पर जल्द परीक्षा आयोजित की जाए। - जज प्रोटेक्शन एक्ट में पटवारियों को शामिल किया जाए
- संघ का कहना है कि पटवारी केवल राजस्व प्रकरणों में प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हैं, जबकि निर्णय तहसीलदार एवं नायब तहसीलदार द्वारा किया जाता है। इसके बावजूद कई मामलों में सीधे पटवारियों पर एफआईआर दर्ज की जाती है। ऐसी स्थिति में तहसीलदार एवं नायब तहसीलदार की तरह पटवारियों को भी जज प्रोटेक्शन एक्ट का संरक्षण दिया जाए।
5.पटवारी संघ ने स्पष्ट किया है कि उनकी सभी मांगें वर्षों से लंबित हैं और अब उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई की अपेक्षा है। यदि सरकार ने शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो प्रदेशभर में आंदोलन को व्यापक रूप दिया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी शासन की होगी।
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