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शासकीय कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास सेमली जदीद में नियमों की धज्जियां, मलाईदार कुर्सी पर 5 साल से एक ही अधीक्षक

शासकीय कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास सेमली जदीद में नियमों की धज्जियां, मलाईदार कुर्सी पर 5 साल से एक ही अधीक्षक

सेमली जदीद हॉस्टल में 3 साल का कार्यकाल नियम ध्वस्त, विभागीय चुप्पी पर सवाल

सेमली जदीद/इछावर, एमपी विश्वास न्यूज, राजेश माँझी

शासकीय कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास सेमली जदीद से बड़ा खुलासा हुआ है। जिस पद पर नियम के मुताबिक महज़ 3 साल तक ही कोई अधिकारी रह सकता है, वहां 5 साल से एक ही अधीक्षक जमे बैठे हैं। ये मामला सिर्फ नियम तोड़ने का नहीं, बल्कि विभागीय मिलीभगत और राजनीतिक संरक्षण का भी है।

सवाल उठ रहे हैं
लोग पूछ रहे हैं कि क्या ये कुर्सी सेवा और जिम्मेदारी निभाने के लिए है, या फिर सरकारी संसाधनों और बजट की मलाई खाने के लिए? यहां अधीक्षक के पास भोजन सामग्री, राशन और अन्य जरूरी सामान की खरीद का पूरा अधिकार है — और यही वजह है कि ये पद ‘मलाईदार’ कहलाता है।

कागज़ों में नियम, जमीन पर सांठगांठ
विभाग की फाइलों में तबादले का नियम साफ लिखा है, लेकिन हकीकत में नियम सिर्फ दिखावे के लिए हैं। अधीक्षक का तबादला न होना और इतने लंबे समय तक एक ही व्यक्ति का पद पर जमे रहना साफ संकेत देता है कि अंदरखाने कोई न कोई खेल जरूर चल रहा है।

प्रभावित हो रहे हैं विद्यार्थी
लंबे समय से एक ही अधीक्षक के पद पर बने रहने से छात्रावास की पारदर्शिता, अनुशासन और विद्यार्थियों के हित प्रभावित हुए हैं। नए और योग्य कर्मचारियों को मौका ही नहीं मिल रहा, जिससे कार्यप्रणाली पर भी असर पड़ रहा है।

जनता की मांग
स्थानीय लोग और अभिभावक अब इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच और नियम अनुसार तत्काल तबादले की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर इस मामले पर सख्ती नहीं बरती गई तो सरकारी छात्रावासों में नियम तोड़ने और मलाईदार पदों पर कब्जा करने का सिलसिला जारी रहेगा।

शासकीय कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास सेमली जदीद में अधीक्षक के पद पर 2021 से पदस्थ हू। लगभग 5 साल होने को है।

अधीक्षक
रीना नागर

हमारे द्वारा लगातार छात्र हित में यह विषय जिम्मेदारों के संज्ञान में लाया जाता है लेकिन हॉस्टल अधीक्षक एक मलाईदार पद है जिसमें यह अधीक्षक अपने ऊपरी अधिकारियों से सांठगांठ रखते है इसीलिए तो कार्यकाल निकालने के बावजूद भी अपने पद पर मजबूती से डटे रहते हैं। हॉस्टल अधीक्षक चयन में भी पारदर्शिता नहीं बरती जाती है।

देवेंद्र सिंह ठाकुर
जिला अध्यक्ष एनएसयूआई

आपके द्वारा मामला संज्ञान में लाया जा रहा है मैं जल्द ही बीआरसीसी को कहकर अधीक्षक हेतु नए उम्मीदवारों के आवेदन बुलवाता हूं।

रमेश राम उइके
डीपीसी सीहोर

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