“शिक्षा का मंदिर या कबाड़खाना? सरकारी स्कूल की छत पर रखा कबाड़ा बना बच्चों के लिए खतरा”
जहां बच्चों को मिलनी चाहिए सुरक्षित और साफ-सुथरी शिक्षा, वहां छत पर जमा कबाड़ा बना जानलेवा खतरा

ब्रिजिशनगर/इछावर,एमपी विश्वास न्यूज
ब्रिजिशनगर/इछावर।”शिक्षा का अधिकार” आज भी सिर्फ कागजों तक ही सीमित है – ऐसा प्रतीत होता है जब हम सरकारी स्कूलों की जमीनी हकीकत पर नजर डालते हैं। ताजा मामला जन शिक्षा केंद्र सेमली जदीद, संकुल केन्द्र ब्रिजिश नगर के अन्तर्गत एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय कनेरिया का है, जो महज संकुल केन्द्र ब्रिजिशनगर से 3 किलो मीटर की दूरी पर है।जिसे कभी ‘शिक्षा का मंदिर’ कहा जाता था, लेकिन आज यह किसी कबाड़खाने से कम नहीं दिखता।
इस स्कूल की छत पर वर्षों से कबाड़ा जमा है – टूटे बेंच, लोहे के पाइप, पुराने दरवाजे और जंग लगे लोहे के सामान रखा है। इस स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे रोज इसी खतरे के साये में बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं।
स्कूल के प्रभारी शब्बीर अहमद ने बताया कि कई बार अधिकारियों को इसकी जानकारी दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। “हर बार बस आश्वासन मिलता है, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है।
क्या शिक्षा का यही चेहरा है?
सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी, बदइंतजामी और लापरवाही कोई नई बात नहीं है। लेकिन जब बच्चों की जान जोखिम में पड़ जाए, तब यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि गंभीर अपराध बन जाता है।
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