हिंदू नववर्ष रौद्र संवत्सर, 2083 मे विश्व में हो सकता है महादंगल। ।।।।।।।।।।।।। llllllllllllllllllllllll llllllll ll डॉ पंडित गणेश शर्मा
सीहोर, एमपी विश्वास न्यूज
सीहोर।हिन्दू नववर्ष २०८३ के बारे में ज्योतिष पद्म भूषण स्वर्ण पदक प्राप्त ज्योतिषाचार्य डॉ पंडित गणेश शर्मा ने बताया कि हिन्दू पंचांग के अनुसार, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नए संवत्सर की शुरुआत होती है। इस वर्ष ‘रौद्र’ नामक संवत्सर प्रारंभ हो रहा है। ज्योतिष शास्त्र में रौद्र’ नाम के संवत्सर को थोड़ा कठोर और उग्र माना जाता है, क्योंकि इसके स्वामी स्वयं भगवान शिव का रुद्र रूप हैं।
वर्ष २०२६ में बृहस्पति (गुरु) का गोचर सबसे अधिक निर्णायक होने वाला है। दूसरी ओर मंगल का मकर राशि में प्रवेश और शनि की वक्री चाल एक ‘महादंगल’ की ओर इशारा कर रही है। मकर से मेष राशि तक शनि के गोचर काल में न्याय का दंड चल रहा है। ऐसे में वर्ष २०२६ में असली चुनौती १९ मार्च २०२६ से शुरू होगी, जब ‘रौद्र नामक संवत्सर’ का उदय होगा। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, यह समय अपने साथ भीषण विनाश और नरसंहार लेकर आ सकता है। जैसा कि नाम से स्पष्ट है, ‘रौद्र’ संवत्सर में लोगों के स्वभाव में चिड़चिड़ापन और क्रोध की अधिकता देखी जा सकती है। बिना सोचे-समझे न बोलें। कड़वे वचन कहने से बचें, अन्यथा पारिवारिक कलह और रिश्तों में दरार आ सकती है। यदि आपकी यह आदत घर के बाहर भी है तो कार्यस्थल या अन्य जगहों पर आप परेशानी में पड़ सकते हैं।
ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इस काल में रक्त संबंधी विकार, पित्त दोष और संक्रामक रोगों का प्रभाव बढ़ सकता है। अपने खान-पान को शुद्ध रखें और नियमित व्यायाम करें। मौसमी बीमारियों को हल्के में न लें और योग का सहारा लें। बाहर के खाने में स्ट्रीट फूड, जंग फूड, फ्रॉजन फूड और प्रोसेस्ड फूड से बचकर रहें। पानी की शुद्धता की जांच करे संवत्सर के उग्र स्वभाव के कारण बाजार में उतार-चढ़ाव की स्थिति बन सकती है। अनावश्यक खर्च और बड़े निवेश में जोखिम हो सकता है। धन का संचय करें। सट्टा बाजार या बिना पूरी जानकारी के किसी भी बड़े वित्तीय प्रोजेक्ट में पैसा लगाने से पहले विशेषज्ञों की सलाह जरूर लें। बचत पर ध्यान दें। रौद्र संवत्सर में प्राकृतिक उथल-पुथल जैसे भारी वर्षा, आंधी-तूफान या आगजनी की घटनाएं अधिक होने की संभावना रहती है। यात्रा के दौरान सावधानी बरतें और वाहन धीमी गति से चलाएं। घर में अग्नि और बिजली के उपकरणों का रखरखाव इस वर्ष जनमानस में असंतोष की भावना बढ़ सकती है, जिससे सामाजिक वैमनस्य, जातिवाद, वर्ग संघर्ष भी बढ़ सकता है या कई तरह के कानूनी विवाद पैदा हो सकते हैं। इसलिए अपनी व्यवहार में संयम रखें और लोगों से मिलते वक्त सावधानी बरतें। किसी भी प्रकार के अनैतिक कार्यों या ।कोर्ट-कचहरी के मामलों से बचें। दूसरों के विवादों में पड़ने के बजाय अपने काम हम पर ध्यान केंद्रित करें।युद्ध और सुरक्षा:- देश की सुरक्षा पहले की अपेक्षा और भी ज्यादा मजबूत होगी। चाहे SIR हो या लड़ाकू विमान खरीदी का मामला हो या फिर सीमाओं कर सड़क और तारबंदी का काम हो यह बहुत तेजी से होने वाला है और हो भी रहा है। आने वाले समय में जब रौद्र नाम का संवत्सर प्रारंभ होगा तो देश और दुनिया में खासकर भारत में पाकिस्तान के साथ एक बार फिर से युद्ध के हालात बनेंगे। बृहस्पति के अंतर्गत मंगल का गोचर पाकिस्तान को मटियामेट कर देगा। ज्ञान और विज्ञान ज्ञान का अर्थ शिक्षा और शोध। इस संबंध में भारत में बढ़े पैमाने पर बदलाव हो रहे हैं और यह बदलाव वर्ष 2026 में और भी तेजी से होंगे। बृहस्पति देव का गोचर शिक्षा को पूरी तरह बदलकर रख देगा। शिक्षा और परीक्षा का पैटर्न बदलता जाएगा जिसकी शुरुआत भी हो चुकी है।
टेक्नॉलोजी:- छाया ग्रह राहु वर्तमान में कुंभ राशि में है और 2 दिसंबर 2025 को उसने शतभिषा नक्षत्र में प्रवेश किया है। कुंभ राशि शनि की है और शतभिषा नक्षत्र राहु का खुद का नक्षत्र है। खुद के नक्षत्र में राहु का गोचर देश और दुनिया में खासकर भारत में टेक्नॉलॉजी का विस्तार तेजी से होगा। हर क्षेत्र में AI तकनीक का उपयोग बढ़ जाएगा। मोबाइल फोन, इंटरनेट, कंप्यूटर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के साथ ही स्पेस में भारत की क्षमता बढ़ती जाएगी।न्याय व्यवस्था बृहस्पति न्याय को कायम करने के लिए किसी भी हद तक जाकर व्यवस्था में बदलाव करने की क्षमता रखते हैं। जब बृहस्पति का कर्क में गोचर होगा तो यह देश और दुनिया में लोकतांत्रिक व्यवस्था के साथ ही न्याय व्यवस्था को बहाल करने के लिए कुछ भी कर सकते हैं। इसके लिए जहां पाकिस्तान जैसे देशों में सैन्य शासन के खिलाफ लोग सड़कों पर उतरेंगे वहीं भारत में सरकार को निरंकुश होने से रोका जाएगा। कई देशों में मंदी के संकेत हैं लेकिन भारत की अर्थ व्यवस्था में जबरदस्त उछाल आएगा। जब गुरु कर्क राशि में प्रवेश करेंगे, तो यह उच्च अवस्था में होंगे, जिससे कुछ समय के लिए आर्थिक स्थिरता, सरकारी कल्याण योजनाओं, कृषि और रियल एस्टेट क्षेत्र में सुधार की उम्मीद की जा सकती है। चांदी की अपेक्षा सोना तेजी से बढ़ेगा। शेयर मार्केट में संतुलन बना रहेगा।
अतितारी बृहस्पति के कारण दुनिया का सुख चैन और मौसम खत्म हो जाएगा। जलवायु परिवर्तन के कारण बाढ़, तूफान और जल संबंधित प्राकृतिक आपदाएं बढ़ जाएगी। आर्थिक स्थिति पर इसका प्रभाव पड़ेगा। राहु के कारण दुनिया में भ्रम फैलेगा, महामारी का प्रकोप रहेगा। मंगल और शनि के कारण महादंगल होगा। वर्तमान में विक्रम संवत 2082 के अंतर्गत कालयुक्त सिद्धार्थ संवत्सर चल रहा है। इस संवत्सर के फलानुसार भारत में और दुनिया में युद्ध और आतंकवाद की घटओं के दर्शन होंगे, जो एक बड़े युद्ध की भूमिका तय करेंगे। महंगाई बढ़ेगी। वर्षा खंडित होगी। कई जगह अकाल और कई जगह बाढ़ के हालात देखने को मिलेंगे। वैश्विक स्तर पर दोस्त और दुश्मन तय हो जाएंगे। इसके बाद अगले साल 19 मार्च 2026 से रौद्र नाम संवत्सर प्रारंभ होगा। यानी विक्रम संवत 2083 से प्रारंभ होगा रौद्र संवत्सर। यह देश और दुनिया में नरसंहार लेकर आएगा। मध्य एशिया में नरसंहार जारी है और अब यह दक्षिण एशिया में भी देखा जाएगा। इस दौरान मौसम में भारी बदलाव होगा और किसी बड़े भूकंप के आने या ज्वालामुखी फटने के संकेत भी मिलते हैं।