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शिक्षा के दीप से असहाय बच्चों का भविष्य संवारने वाले शिक्षक गौरी शंकर श्रीवास्तव का सेवानिवृत्ति सम्मान

शिक्षा के दीप से असहाय बच्चों का भविष्य संवारने वाले शिक्षक गौरी शंकर श्रीवास्तव का सेवानिवृत्ति सम्मान

सैकड़ो असहाय बच्चों के जीवन को रोशन करने वाले दीपक समान शिक्षक गौरी शंकर श्रीवास्तव हुए सेवानिवृत

दिवाडिया/इछावर, एमपी विश्वास न्यूज

दिवाडिया/इछावर — शिक्षा को सेवा और साधना मानकर सैकड़ों असहाय एवं जरूरतमंद बच्चों के जीवन को नई दिशा देने वाले वरिष्ठ शिक्षक गौरी शंकर श्रीवास्तव के सेवानिवृत्त होने पर एक भावपूर्ण सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।

समारोह में शिक्षकों, विद्यार्थियों, अभिभावकों एवं गणमान्य नागरिकों ने उनकी दीर्घकालीन सेवाओं को स्मरण करते हुए उन्हें शिक्षा का दीपक बताया, जिन्होंने अपने पूरे कार्यकाल में न केवल पाठ्यक्रम पढ़ाया बल्कि जीवन मूल्यों, अनुशासन और आत्मविश्वास का संस्कार भी विद्यार्थियों में रोपित किया।

शिक्षक एक ऐसा पेशा है जो न केवल ज्ञान बांटता है, बल्कि जीवन को भी रोशन करता है। ऐसा ही एक उदाहरण हैं गौरीशंकर श्रीवास्तव, जो शिक्षा विभाग से सेवानिवृत हो गए। गौरीशंकर श्रीवास्तव ने अपने कार्यकाल के दौरान सैकड़ो गरीब बच्चों की फीस अपने जेब से भरकर उन्हें शिक्षा का अवसर प्रदान किया। गौरीशंकर श्रीवास्तव शासकीय हाई सेकेंडरी स्कूल दिवाड़िया में प्राचार्य के पद पर लंबे समय तक अपनी सेवाएं देते रहे । जहां उन्होने पिछड़े परिवारों के शिक्षा छोड़ चुके सैकड़ो बच्चों के पालकों से बच्चों के भविष्य को लेकर निरंतर संपर्क किया और उन्हें शिक्षा के प्रति जागरूक किया जिसका परिणाम यह देखा गया कि कुछ ही दिनों में शासकीय स्कूल दीवाडीया में कुछ दिनों में बच्चों की संख्या दो अंको से तीन अंकों में बदल गई ओर कुछ सालों में यह आंकड़ा हजार को भी पार कर गया, इस दौरान गौरीशंकर श्रीवास्तव द्वारा सैकड़ो असहाय बच्चों की फीस अपने जेब से इसलिए भरी गई ताकि वह शिक्षा से वंचित न रह सके,उनके कार्यकाल में स्कूल का परिणाम हमेशा अच्छा रहा और उन्होंने छात्रों को शिक्षा के साथ-साथ जीवन के मूल्यों की भी शिक्षा दी। लेकिन गौरीशंकर श्रीवास्तव की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि वे गरीब बच्चों की मदद करने में हमेशा आगे रहते थे। उन्होंने सैकड़ो गरीब बच्चों की फीस अपने जेब से भरकर उन्हें शिक्षा का अवसर प्रदान किया।

आज गौरीशंकर श्रीवास्तव सेवानिवृत हो गए हैं, लेकिन उनके द्वारा पढ़ाए गए छात्र आज विभिन्न क्षेत्रों में सफल हैं और अपने जीवन को यापन कर रहे हैं। वे सभी अपने शिक्षक गौरीशंकर श्रीवास्तव को अपना प्रेरणा स्रोत मानते हैं और उनके प्रति आभार व्यक्त करते हैं।

गौरीशंकर श्रीवास्तव पेशे से शिक्षक थे, लेकिन उनके अंदर कई स्वरूप थे। वे एक अच्छे शिक्षक, एक अच्छे मार्गदर्शक और एक अच्छे इंसान है। उन्होंने अपने कार्यकाल में न केवल छात्रों को शिक्षा दी, बल्कि उन्हें जीवन के मूल्यों की भी शिक्षा दी वैसे उनकी नियुक्ति सामाजिक विज्ञान से हुई तथा बाद में उन्होने उच्च पद प्रभार अंग्रेजी विषय से धारण किया।

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