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माँझी जनजाति के अध्ययन पर उठे सवाल, हाईकोर्ट ने शासन से मांगा जवाब

8 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई

सीहोर, एमपी विश्वास न्यूज
संपर्क 9200718280

सीहोर।सीहोर- माँझी जनजाति के संवैधानिक अधिकारों और उसके ऐतिहासिक-अनुसंधान संबंधी दस्तावेजों को लेकर दायर जनहित याचिका पर उच्च न्यायालय जबलपुर ने शासन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका माझी जनजाति सामाजिक विकास कल्याण समिति के अध्यक्ष राकेश कश्यप ने प्रस्तुत की है।

याचिका में कहा गया है कि 7 जनवरी 1950 को तत्कालीन विंध्य प्रदेश ने माझी (केवट, मल्लाह, भोई, ढीमर) को जनजाति मानते हुए केंद्र सरकार को अनुशंसा भेजी थी। इसके बाद 7 सितंबर 1951 की अधिसूचना में दतिया, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, सीधी और शहडोल जिलों में माझी जनजाति को मान्यता दी गई। बाद में 20 सितंबर 1976 के संशोधन राजपत्र में माझी को अनुसूचित जनजाति सूची में पूरे मध्यप्रदेश के लिए अधिसूचित किया गया।

याचिकाकर्ता का आरोप है कि मांझी और मझवार से संबंधित अलग-अलग ऐतिहासिक एवं मानवशास्त्रीय अध्ययनों को एक-दूसरे के स्थान पर उपयोग किए जाने से माझी समुदाय के जाति प्रमाण-पत्रों में परेशानी आ रही है। याचिका में भारत सरकार के महारजिस्ट्रार एवं एंथ्रोपोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया से संबंधित अध्ययनों को आधार बनाने की मांग की गई है।

मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अल्पेश यशवंत कोगजे एवं न्यायमूर्ति दीपक खोट की खंडपीठ ने की। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता जगदीश साकल्ले तथा शासन की ओर से विवेक शर्मा ने पक्ष रखा।

कोर्ट ने शासन से जवाब तलब किया है।

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