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जनसुनवाई या मज़ाक? कलेक्टर के आदेशों की खुलेआम धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं और प्रशासन आँखें मूँदे बैठा है।

जनसुनवाई या मज़ाक? कलेक्टर के आदेशों की खुलेआम धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं और प्रशासन आँखें मूँदे बैठा है।

ग्राम पंचायत आर्या में
अकेले पंचायत सचिव जनसुनवाई में सुन रहे जनता की समस्या,

रोजगार सहायक और पटवारी जनसुनवाई से रहे गायब

इछावर/सीहोर,एमपी विश्वास न्यूज

इछावर/सीहोर।सीहोर जिले के इछावर जनपद की ग्राम पंचायत आर्या में जनसुनवाई के नाम पर सिर्फ़ औपचारिकता निभाई गई। मौके पर मीडिया टीम पहुंची तो जनसुनवाई में जनता की समस्याएँ सुनने के लिए अकेले पंचायत सचिव ही मौजूद रहे।जबकि सीहोर कलेक्टर बाला गुरु के. के सख्त निर्देश है कि जनसुनवाई को मजबूत बनाने के लिए सभी विभाग के कर्मचारियों का होना अनिवार्य है। एवं अधिक से अधिक जनता की समस्याओं का निराकरण तत्काल किया जाए।

लेकिन जमीनी हकीकत कुछ ओर ही है,

रोज़गार सहायक और राजस्व विभाग के पटवारी पूरी तरह नदारद रहे। जबकि कलेक्टर के स्पष्ट निर्देश हैं कि जनसुनवाई में सभी संबंधित विभागों की उपस्थिति अनिवार्य होगी।

सवाल यह है कि जब ज़मीन, रोज़गार और योजनाओं से जुड़े जिम्मेदार अधिकारी ही मौजूद नहीं होंगे, तो ग्रामीण अपनी समस्याएँ किससे कहें?
ग्रामीणों की नाराज़गी:
ग्रामीणों का कहना है कि वे दूर-दराज़ से जनसुनवाई में पहुँचे, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी न मिलने से उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ा।

यह महज़ लापरवाही नहीं, बल्कि कलेक्टर के आदेशों की खुली अवहेलना है। अब देखना होगा कि प्रशासन कार्रवाई करता है या फिर जनसुनवाई जनता के साथ एक मज़ाक बनकर रह जाएगी।

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