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इतिहास में पहली बार पांगला बाबा के स्थान सेमली जदीद में बैठी माता जी का हुआ नर्मदा विसर्जन

इतिहास में पहली बार पांगला बाबा के स्थान सेमली जदीद में बैठी माता जी का हुआ नर्मदा विसर्जन

यजमान नरेश सेन ने की यह ऐतिहासिक शुरुआत

सेमली जदीद, जिला सीहोर—एमपी विश्वास न्यूज

सीहोर।सीहोर जिले के इछावर तहसील से 14 किलो मीटर की दूरी पर सेमली जदीद गांव स्थित है। सेमली जदीद के मुख्य चौराहे पर पांगला बाबा का स्थान स्थित है। पांगला बाबा के स्थान पर 30 वर्षों से (सन 1995 ) से मूर्ति की प्रतिमा की स्थापना की जाती है, नवरात्रि में गरबा महोत्सव,चुनरी यात्रा, भजन संध्या,कन्या भोजन सभी का आयोजन नव दुर्गा उत्सव समिति के द्वारा संचालित किया जाता है।इस वर्ष के यजमान नरेश सेन की ओर से माता जी स्थापना करवाई गई,जहा पांगला बाबा के ऐतिहासिक स्थल पर इस वर्ष एक नया अध्याय जुड़ गया, जब इतिहास में पहली बार यहाँ विराजित माता रानी की प्रतिमा का विसर्जन नर्मदा नदी में किया गया। यह पावन कार्य सेमली जदीद ग्राम के श्रद्धालु यजमान नरेश सेन द्वारा संपन्न किया गया, जिन्होंने इस परंपरा को एक नई दिशा दी।

हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी शारदीय नवरात्रि के अवसर पर माता रानी की प्रतिमा को पूरे श्रद्धा और भक्तिभाव से विराजित किया गया था। लेकिन इस बार विशेष यह रहा कि विसर्जन के लिए पारंपरिक स्थान की बजाय पवित्र नर्मदा नदी को चुना गया। नरेश सेन ने इसे धार्मिक आस्था और पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया।

ग्रामीणों और भक्तों की भारी उपस्थिति में माता जी की शोभायात्रा पूरे गांव में निकाली गई, सेमली जदीद के मुख्य चौराहे पर रावण दहन किया गया। आखड़े में सरपंच प्रतिनिधि जगदीश प्रसाद वर्मा, रामचरण मीणा और कई ग्रामीणों ने अपनें करतब दिखाए।जिसके बाद सभी ने मिलकर “जय माता दी” के जयकारों के साथ प्रतिमा को नर्मदा जी में विधिपूर्वक विसर्जित किया।

इस ऐतिहासिक पहल को लेकर गांव में उत्साह का माहौल रहा। कई वरिष्ठ नागरिकों और श्रद्धालुओं ने इसे एक सकारात्मक और अनुकरणीय कदम बताया, जो आने वाले वर्षों में एक नई परंपरा की नींव रख सकता है।

यजमान नरेश सेन ने बताया कि,

“माता रानी की कृपा से यह अवसर मिला। नर्मदा मैया में प्रतिमा विसर्जन एक पवित्र अनुभव था। हमारी कोशिश है कि इससे समाज को भी एक अच्छा संदेश जाए।”

नर्मदा मैया के जल में माता रानी के समर्पण ने दिया आस्था को नया आयाम

ग्रामीणों की ओर से यह मांग भी उठी कि इस परंपरा को आगे भी जारी रखा जाए। आयोजकों ने बताया कि अगली बार और भी भव्य रूप में विसर्जन यात्रा का आयोजन किया जाएगा।

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