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चौथे स्तंभ पर हमला! डाबरी में हजारों सागौन कटे, कवरेज करने गए पत्रकार से वनरक्षक ने छीना मोबाइल

चौथे स्तंभ पर हमला! डाबरी में हजारों सागौन कटे, कवरेज करने गए पत्रकार से वनरक्षक ने छीना मोबाइल

सीहोर/इछावर। रिपोर्ट: राजेश माँझी | MP विश्वास न्यूजसंपर्क 9200718280

सीहोर।एक तरफ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी “एक पेड़ माँ के नाम” का आव्हान कर रहे हैं। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान हर दिन एक पेड़ लगाने की अपील कर रहे हैं ताकि पर्यावरण सुरक्षित रहे और आने वाले समय में जंगल बच सकें।

लेकिन दूसरी तरफ सीहोर जिले के बुधनी विधानसभा क्षेत्र के डाबरी गांव में वन विकास निगम की नाक के नीचे ही 50 से 100 एकड़ पर लगे हजारों सागौन के पेड़ जमींदोज कर दिए गए। वन विकास निगम के कक्ष क्रमांक 259, 260 में इमारती सागौन को काटकर मैदान बना दिया गया।

कवरेज पर हमला, BNS 304 में मामला
बुधवार दोपहर 12 से शाम के बीच जब विस्तार न्यूज के संवाददाता अक्षय शर्मा और मीडिया साथी जलील खान ग्राउंड जीरो से कवरेज करने पहुंचे तो वन विकास निगम के एक वन कर्मचारी ने आला अधिकारियों के सामने ही उनका मोबाइल छीन लिया और कवरेज करने से रोका। जानकारी अनुसार बताया गया कि देवेन्द्र परमार नामक वनरक्षक ने मोबाइल छीना वापिस भी मोबाइल नहीं किया। पत्रकार के मोबाइल से जरुरी डेटा डिलीट करने की आशंका जताई जा रही हैं।

पत्रकारों ने भेरूंदा थाने में शिकायत की है। इस मामले में BNS 304 – स्नैचिंग, BNS 351 – आपराधिक धमकी, BNS 352 – अपमान और BNS 198 – लोक सेवक द्वारा कानून का उल्लंघन की धाराओं के तहत मामला दर्ज करने की मांग की गई है।

सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि ये पूरा रकबा राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा के विधानसभा क्षेत्र में आता है।

अधिकारी कर रहे बचाव, माफिया को संरक्षण?
मामले को लेकर जब निगम के अधिकारियों से सवाल किया गया तो उन्होंने वनकर्मी का बचाव करते हुए उसका नाम तक बताना उचित नहीं समझा।

स्थानीय लोगों के मुताबिक ये कटाई एक-दो दिन की नहीं बल्कि महीनों से चल रही थी। वन चौकी से महज 2-3 किलोमीटर की दूरी पर 50 से 100 एकड़ में हजारों पेड़ काटे गए, लेकिन निगम के अधिकारियों-कर्मचारियों को भनक तक नहीं लगी। मौके पर पड़ी लकड़ियां इस बात की गवाह हैं।

विभाग की मिलीभगत से इंकार नहीं
संविधान ने पत्रकारों को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना है। कवरेज के दौरान मोबाइल छीनना सीधे तौर पर विभाग की मिलीभगत और सागौन माफिया को संरक्षण देने का संकेत है।

“एक पेड़ माँ के नाम” का नारा बुलंद करने वाले प्रदेश में अगर हजारों पेड़ इस तरह काटे जा रहे हैं और खबर दबाई जा रही है, तो सवाल उठता है – जंगल बचेंगे कैसे?

आजकल हमारे देश में किसी को छूना तक उचित नहीं माना जाता, ऐसे में मोबाइल छीनना तो बेहद गंभीर मामला है। आपके द्वारा मामला संज्ञान में लाया गया है। पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी। मौके पर काफी मात्रा में इमारती सागौन के पेड़ों की कटाई होना सामने आया है। यदि जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी की मिलीभगत अथवा लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित के विरुद्ध नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। आपका मोबाइल छीनना बहुत गंभीर विषय है, जॉच कर वैधानिक कार्यवाही की जाएगी।

,RGM
प्रकुल फुले,निगम भोपाल

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